Sunday, July 3, 2011

गजल

सुबह हो रही है
जीवन जाग रहा है
आगे-आगे भाग रहा है
सतह हो रही है.....

मेरे मन में भाव जगे हैं
भावनाओं के हुये जगमगे हैं
फतह हो रही है......

.सूबे सिहं सुजान

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